संदेश

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर संकट? 9 मार्च को हटाने के प्रस्ताव पर बहस संभव

चित्र
नई दिल्ली: देश की संसद में आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल तेज हो सकती है। जानकारी के अनुसार,  लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने से जुड़ा प्रस्ताव 9 मार्च को सदन में चर्चा के लिए लाया जा सकता है।  इस मुद्दे ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के कुछ दलों ने  लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव  लाने की तैयारी की है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही और कई मौकों पर विपक्ष की आवाज को दबाया गया। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों को  राजनीतिक और निराधार  बताया जा रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि स्पीकर ने हमेशा संसदीय नियमों और परंपराओं के अनुसार ही सदन का संचालन किया है। 9 मार्च को क्यों अहम है? संसदीय सूत्रों के अनुसार,  9 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर बहस होने की संभावना है।  अगर यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश होता है, तो उस पर चर्चा के बाद मतदान भी कराय...

US-इज़रायल बनाम ईरान युद्ध का छठा दिन: ड्रोन हमलों के बाद अज़रबैजान ने ईरानी राजदूत को तलब किया, खाड़ी देशों को एयर-डिफेंस देगा इटली

चित्र
 दोस्तों, मध्य पूर्व में जारी ईरान–इज़रायल संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है। युद्ध का छठा दिन कई नए घटनाक्रमों के साथ सामने आया है। एक तरफ जहां ड्रोन हमलों को लेकर अज़रबैजान ने ईरान के राजदूत को तलब किया, वहीं दूसरी ओर इटली ने खाड़ी देशों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एयर-डिफेंस सहायता भेजने का फैसला किया है। इन घटनाओं ने इस क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। युद्ध के छठे दिन बढ़ा तनाव ईरान और इज़रायल के बीच शुरू हुआ यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ गई है। दोनों पक्षों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार जारी हैं, जिससे कई देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। ड्रोन हमलों पर अज़रबैजान की कड़ी प्रतिक्रिया ताजा घटनाक्रम में अज़रबैजान ने ईरान के राजदूत को तलब किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में हुए ड्रोन हमलों को लेकर अज़रबैजान ने कड़ी नाराजगी जताई है। अज़...

बॉक्स ऑफिस पर पहले ही छाई ‘धुरंधर: द रिवेंज’, ट्रेलर से पहले US में बंपर एडवांस बुकिंग

चित्र
  बॉलीवुड सुपरस्टार   रणवीर सिंह   की आने वाली फिल्म   ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (Dhurandhar: The Revenge)   रिलीज से पहले ही सुर्खियों में छा गई है। खास बात यह है कि फिल्म का   ट्रेलर अभी रिलीज भी नहीं हुआ है , लेकिन इसके बावजूद अमेरिका में एडवांस बुकिंग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। फिल्म को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फिल्म रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाका कर सकती है। ट्रेलर से पहले ही रिकॉर्डतोड़ एडवांस बुकिंग आमतौर पर किसी भी फिल्म की एडवांस बुकिंग ट्रेलर रिलीज और प्रमोशन के बाद शुरू होती है, लेकिन  ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने इस ट्रेंड को बदल दिया है । अमेरिका के कई बड़े शहरों में फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू होते ही टिकट तेजी से बिकने लगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ ही घंटों में कई शो  हाउसफुल  हो गए, जिससे फिल्म ने एडवांस बुकिंग के मामले में नया रिकॉर्ड बना दिया। रणवीर सिंह की स्टार पावर का असर फिल्म की जबरदस्त एडवांस बुकिंग के पीछे  रणवीर सिंह की लोकप्रियता  को सबसे बड़ा कार...

राष्ट्रपति ने 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों की फेरबदल को दी मंजूरी

चित्र
  भारत की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।   राष्ट्रपति ने 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में राज्यपालों के फेरबदल को मंजूरी दे दी है।   इस फैसले के बाद कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है, जबकि कुछ राज्यपालों का तबादला भी किया गया है। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक संतुलन और बेहतर समन्वय के नजरिए से देखा जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। क्या होता है राज्यपाल का पद? भारत में राज्यपाल किसी भी राज्य का  संवैधानिक प्रमुख  होता है। राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह केंद्र सरकार की सलाह पर काम करते हैं। राज्यपाल का मुख्य काम राज्य की सरकार और केंद्र के बीच  संवैधानिक समन्वय बनाए रखना  होता है। इसके अलावा विधानसभा सत्र बुलाने, बिलों को मंजूरी देने और सरकार गठन जैसी कई अहम जिम्मेदारियां भी राज्यपाल निभाते हैं। 9 राज्यों और UTs में हुआ फेरबदल ताजा फैसले के तहत  9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों की...

क्रिस्टी नोएम के 6 बड़े विवाद: जब-जब सुर्खियों में आईं अमेरिका की यह नेता

चित्र
  अमेरिका की राजनीति में कई ऐसे नेता हैं जो अपने फैसलों और बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं। उन्हीं में से एक नाम है   क्रिस्टी नोएम (Kristi Noem)   का। साउथ डकोटा की पूर्व गवर्नर और अमेरिकी राजनीति की चर्चित शख्सियत क्रिस्टी नोएम कई बार विवादों के कारण सुर्खियों में रही हैं। कभी  अपने पालतू कुत्ते को मारने के बयान  की वजह से तो कभी  लग्ज़री जेट और सरकारी खर्चों  को लेकर उन पर सवाल उठे। आइए जानते हैं वो  6 बड़े विवाद , जिनकी वजह से क्रिस्टी नोएम बार-बार खबरों में आईं। 1. पालतू कुत्ते को मारने का विवाद क्रिस्टी नोएम का सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब उनकी किताब में यह खुलासा हुआ कि उन्होंने अपने  पालतू कुत्ते को गोली मारकर खत्म कर दिया था । उन्होंने दावा किया कि कुत्ता बहुत आक्रामक हो गया था और लोगों के लिए खतरा बन सकता था। हालांकि यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे  अमानवीय कदम  बताया और उनकी जमकर आलोचना की। 2. लग्ज़री जेट के इस्तेमाल पर सवाल क्रिस्टी नोएम पर  सरकारी काम...

नेपाल में बदली सियासत! बालेन शाह की पार्टी भारी बहुमत की ओर

चित्र
  नेपाल की राजनीति में साल 2026 का चुनाव एक बड़े बदलाव का संकेत देता हुआ नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों में काठमांडू के मेयर और लोकप्रिय युवा नेता   बालेन शाह   की पार्टी को जबरदस्त बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। ताजा चुनावी आंकड़ों के अनुसार उनकी पार्टी कई सीटों पर आगे चल रही है और   भारी बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ती नजर आ रही है । यह परिणाम नेपाल की पारंपरिक राजनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से सत्ता पर काबिज बड़ी पार्टियों को इस बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। युवाओं का भरोसा बना बालेन शाह की ताकत राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण  युवा मतदाताओं का समर्थन  है। काठमांडू के मेयर बनने के बाद उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिनसे आम लोगों के बीच उनकी छवि एक ईमानदार और सख्त प्रशासक की बनी। यही वजह है कि इस चुनाव में बड़ी संख्या में युवाओं ने पारंपरिक पार्टियों से अलग हटकर  बदलाव की राजनीति को वोट दिया । सोशल मीडिया पर भी बालेन शाह के समर्थन में बड़ी मुहिम देखने को मिली। पुराने...